<p><br></p><p><b>चुनाव आयोग</b> ने 18 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें आधार से वोटर आईडी को जोड़ने के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कथित फर्जी मतदाताओं को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान करना है। चुनाव आयोग ने पहले ही राजनीतिक दलों से इस बारे में प्रतिक्रियाएं मांगी थीं।</p><p>देशभर में चुनावी प्रक्रिया में फर्जी नामों को लेकर आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने केंद्रीय गृह सचिव और विधायी सचिव के साथ इस बैठक की योजना बनाई है। इस बैठक में विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और ममता बनर्जी द्वारा मतदाता सूचियों में फर्जी नामों के आरोपों के बीच आधार से वोटर लिस्ट को जोड़ने के मुद्दे पर विचार हो सकता है।</p><p>हालांकि, वर्तमान में इस बारे में कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग ने मतदाताओं से स्वेच्छा से आधार नंबर देने का अनुरोध किया है। 18 मार्च की बैठक में इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से सुझाव आमंत्रित किए हैं और उनसे 30 अप्रैल तक आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है।</p><p>चुनाव आयोग ने पहले ही अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे राजनीतिक दलों के साथ नियमित रूप से बैठक करें और प्राप्त सुझावों को कानूनी प्रावधानों के तहत सख्ती से हल करें। 31 मार्च तक एक कार्रवाई रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।</p><p><br></p><p><br></p>